Shanghai Cooperation Organization
संक्षिप्त इतिहास (Short history — 3-4 पंक्तियाँ)
Shanghai Cooperation Organisation (SCO) की शुरुआत 1990s के दशक में बॉर्डर-सुरक्षा और भरोसेमंद रिश्तों को मजबूत करने के लिए हुई थी। 2001 में यह औपचारिक संस्था बनी और आज इसमें एशिया-प्रशान्त के कई प्रमुख देशों की भागीदारी है। SCO का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाना है — खासकर आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ मिलकर काम करना।
25वीं शिखर सम्मेलन —
25वां SCO शिखर-सम्मेलन चीन के टियांजिन शहर में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में संगठन के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए जिसमे भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल रहे |
SCO शिखर-सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य:-
क्षेत्रीय सुरक्षा-सहयोग को मजबूत करना — आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा-पार अपराधों पर साझा रूपरेखा।
आर्थिक और निवेश संबंधों को बढ़ाना — कनेक्टिविटी परियोजनाएँ, व्यापार-सरलीकरण और निवेश हेतु नीतिगत समन्वय।
डिजिटल और साइबर सहयोग — डेटा साझा करने, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के नियमन पर समन्वय।
ऊर्जा व हरित विकास — ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास लक्ष्यों पर विचार।

एजेंडा-बिन्दु (मुख्य बातें):
आतंक-निरोध और सीमा-सुरक्षा के लिए साझा उपायों का निर्माण।
सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए मंच स्थापित करना।
साइबर अपराध व गलत सूचनाओं से निपटने हेतु तकनीकी सहयोग।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में कार्यक्रमों का विस्तार।
प्रमुख परिणाम (outcomes):
1. आतंकवाद का विरोध – सम्मेलन में सभी देशों ने आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की। सीमापार आतंकवाद को खत्म करने पर जोर दिया गया किसी भी देश के हितों के खिलाफ हिंसक संगठनों के उपयोग को अस्वीकार किया गया।
2. लाओस को नया साझेदार देश (Partner Country) के रूप मे स्वीकार किया गया अब संगठन में कुल 27 देश जुड़े हैं — जिनमें 10 सदस्य राष्ट्र (भारत सहित) और 17 साझेदार देश शामिल हैं।
3. ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव” (GGI) नाम की पहल रखी गई। इसका उद्देश्य समानता, बहुपक्षवाद और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देना है। “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की भावना को मजबूत किया गया।
4. सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का प्रोत्साहन सभी देशों ने एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान बढ़ाने पर सहमति जताई।
नाज़ीवाद, नस्लवाद और विदेशी-विरोधी नीतियों की निंदा की गई।
5. गाज़ा और इराक जैसे क्षेत्रों में हिंसा और आतंक की घटनाओं पर चिंता जताई गई और शांति बनाए रखने की अपील की गई।
आर्थिक और विकास सहयोग सदस्य देशों ने आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाने का निर्णय लिया। “SCO विकास बैंक” (SCO Development Bank) बनाने का सुझाव दिया गया।
6. क्षेत्र में स्थिर और संतुलित आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
वैश्विक बहुपक्षवाद मे SCO की भूमिका :-
भूराजनीतिक पहुँच का विस्तार – SCO में 10 पूर्णकालिक सदस्य देश हैं (चीन, भारत, पाकिस्तान, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान, बेलारूस) इन देशों की आबादी लगभग विश्व की 40 % से अधिक है और यह क्षेत्र भूमि के हिसाब से यूरेशिया का लगभग 60% हिस्सा है |
सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी उपाय – ताशकंद ( उज्बेकिस्तान ) स्थित SCO की क्षेत्रीय आतंकरोधी-रोधी संरचना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूती प्रदान करती है| सदस्य देशों ने सीमा-क्षेत्रीय विश्वास-निर्माण संधियाँ और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया है।
संपर्कता और आर्थिक एकीकरण
2001 में जब SCO की आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हुई थीं, तब चीन-SCO अन्य सदस्यों के साथ व्यापार लगभग 100 बिलियन युआन था; 2024 में यह लगभग 3.65 ट्रिलियन युआन हो गया था (करीब 30 गुना वृद्धि) |
2024 में चीन-SCO सदस्यों के बीच व्यापार लगभग US$ 512.4 बिलियन था।
2001 से 2020 के बीच, SCO क्षेत्र में अंतः-क्षेत्रीय व्यापार का हिस्सा लगभग 5.4 % से बढ़कर 17.5 % तक हुआ था।
सभ्यता और विकासात्मक सहयोग का मंच
SCO सदस्य देशों का संयुक्त GDP विश्व GDP का लगभग 24 % के आसपास है
कृषि व्यापार के संदर्भ में: 2021 में SCO सदस्यों ने वैश्विक कृषि निर्यात का लगभग 8.7 % और कृषि आयात का लगभग 13.9 % हिस्सा लिया।
वैश्विक संस्थाओं का सुधार
SCO का लक्ष्य एक बहुध्रुवीय (multipolar) विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जहाँ बड़े वैश्विक संस्थाओं (जैसे United Nations, World Trade Organization) में अधिक संतुलित भागीदारी संभव हो।
SCO सदस्यों के पास ऊर्जा संसाधनों (तेल-गैस) का लगभग 20 % और प्राकृतिक गैस का लगभग 44 % हिस्सा रहा है (2021 में) — जिससे वैश्विक संसाधन नियंत्रण के संदर्भ में इसकी भूमिका मजबूत होती है।
SCO की प्रभावशीलता को कमजोर करने वाली प्रमुख चुनौतियाँ
कमजोर सुरक्षा व्यवस्था
RATS (Regional Anti-Terrorist Structure) सिर्फ अभ्यास कराता है,
लेकिन असली आतंकवादी संगठनों के खिलाफ इसका असर बहुत सीमित है।
सदस्य देशों की विश्वसनीयता पर सवाल
पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों की सदस्यता,
जिनका खुद आतंकवाद से जुड़ाव रहा है, यह संगठन की साख को कमजोर करती है।
असमान शक्ति संतुलन
चीन और रूस का प्रभाव संगठन में ज़्यादा है, जबकि मध्य एशियाई देशों को बराबर भागीदार की तरह नहीं माना जाता।
समानता और सम्मान का अभाव
शंघाई भावना’ (Shanghai Spirit) की बात तो की जाती है, पर व्यवहार में यह सिर्फ भाषणों तक ही सीमित दिखाई देती है।
कमज़ोर आर्थिक एकीकरण
SCO के आर्थिक समझौते (जैसे परिवहन या व्यापार)
अभी तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाए हैं। संगठन देशों के बीच आपसी व्यापार कुल व्यापार का केवल 25% है, जो ASEAN जैसे समूहों से काफी कम है।
स्थानीय व्यापार वृद्धि की धीमी गति
मध्य एशिया में व्यापारिक विकास की गति अभी भी धीमी है, और यह SCO की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल नहीं रही।
संस्थागत क्षमता की कमी
ASEAN जैसी संस्थाओं के पास विवाद सुलझाने की बेहतर व्यवस्था है,
जबकि SCO के पास ऐसा कोई मजबूत ढांचा नहीं है। इसके निर्णय अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाते हैं, जिनका वास्तविक प्रभाव बहुत कम होता है।
भारत के लिए प्रमुख बिंदु:
भारत ने मंच पर यह रेखांकित किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास दोनों जरूरी हैं और आतंकवाद-समर्थन के विरुद्ध स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारत-भागीदारी के अवसरों पर चर्चा हुई, साथ ही क्षेत्रीय व्यापार के लिए भरोसेमंद नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
SCO के संबंध में भारत की प्रमुख चिंताएँ
चीन का बढ़ता प्रभाव
चीन संगठन (SCO) में अपने नेतृत्व को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है। वह BRI (Belt and Road Initiative) के ज़रिए आर्थिक और सामरिक प्रभाव बढ़ा रहा है,
जिसका भारत विरोध करता है क्योंकि यह उसकी संप्रभुता को प्रभावित कर सकता है। इससे संगठन में भारत की भूमिका और प्रभाव घटने का खतरा है।
कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विवाद
भारत चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का विरोध करता है,
क्योंकि यह पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। अधिकांश SCO सदस्य देश इस परियोजना का समर्थन करते हैं, जिससे भारत अकेला पड़ जाता है और उसका क्षेत्रीय प्रभाव सीमित होता है।
क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और सामरिक असंतुलन
चीन की “String of Pearls” रणनीति (हिंद महासागर में ठिकाने बनाना)
भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती है। भारत इसका जवाब अपनी “Necklace of Diamonds” रणनीति से देता है, लेकिन इस प्रतिस्पर्धा से SCO के अंदर आपसी विश्वास कमजोर होता है।
आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका
SCO का RATS संगठन आतंकवाद पर चर्चा तो करता है, लेकिन पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के मुद्दे को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। जब भारत पाकिस्तान-स्थित आतंकी संगठनों का नाम लेने की कोशिश करता है, तो चीन और पाकिस्तान मिलकर उसे रोक देते हैं।
सीमित भागीदारी और प्रभाव
भारत कई SCO पहल जैसे BRI और CPEC से बाहर रहता है, जिससे उसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव सीमित हो जाता है। संगठन में भारत की आवाज़ अन्य बड़े देशों की तुलना में उतनी प्रभावी नहीं रहती।
आगे की राह (Best Points)
चयनात्मक भागीदारी (Selective Participation)
भारत को SCO की उन पहलों में ही सक्रिय भाग लेना चाहिए
जो उसके राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के अनुकूल हों। जैसे — RATS जैसी सुरक्षा पहलों में भागीदारी रखी जा सकती है, लेकिन BRI या CPEC जैसी विवादित परियोजनाओं से दूरी बनानी चाहिए।
सहयोग और प्रतिस्पर्धा में संतुलन
भारत को संवेदनशील क्षेत्रों (सीमा, रक्षा, सुरक्षा) में सावधानी रखनी चाहिए,
और चीन के साथ सहयोग को गैर-संवेदनशील क्षेत्रों जैसे व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और संस्कृति तक सीमित रखना चाहिए।
रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना
भारत को रूस के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहिए, ताकि SCO में चीन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। रूस, भारत और चीन के बीच बेहतर संवाद से
क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास बढ़ाया जा सकता है।
नवाचार और हरित तकनीक पर ध्यान
भारत को SCO मंच का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा,
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे भविष्यमुखी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए करना चाहिए।
बहुपक्षीय मंचों का प्रभावी उपयोग
भारत को SCO को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए, ताकि वह मध्य एशिया, रूस, और चीन के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को संतुलित रूप से आगे बढ़ा सके।
RIC (रूस–भारत–चीन) संवाद को पुनर्जीवित करना
RIC तंत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पुल है,जो भारत को चीन से सीधे टकराव के बजाय संवाद और सहयोग के मार्ग पर बनाए रख सकता है।